• About
  • Advertise
  • Contact
  • Login
Newsletter
NRI Affairs
Youtube Channel
  • News
  • Video
  • Opinion
  • Culture
  • Visa
  • Student Hub
  • Business
  • Travel
  • Events
  • Other
No Result
View All Result
  • News
  • Video
  • Opinion
  • Culture
  • Visa
  • Student Hub
  • Business
  • Travel
  • Events
  • Other
No Result
View All Result
NRI Affairs
No Result
View All Result
Home Opinion

वो फ़िल्में आपको समझा रहीं थीं, लेकिन आप समझे नहीं

NRI Affairs News Desk by NRI Affairs News Desk
August 5, 2021
in Opinion
Reading Time: 2 mins read
A A
0
Ramayan
Share on FacebookShare on Twitter

रामानन्द सागर की रामायण के एक सीन में लक्ष्मण जी, श्री राम से पूछते हैं कि क्या श्री राम त्रिकालदर्शी हैं? क्या वो भूत, वर्तमान और भविष्य और तीनों काल देख सकते हैं?

गौरव आसरी

लक्ष्मण पूछते हैं,“अयोध्या के लोग आपको भगवान मानते हैं, क्या आप सचमुच भगवान हैं?” उस सीन में श्री राम ने जो जवाब दिया उसने मेरा दिल जीत लिया. लेकिन वो जवाब क्या था ये मैं आपको बाद में बताऊँगा. पहले मैं आपको ये बताता हूँ कि मैं आज ये बात क्यों कर रहा हूं?

दरअसल, एक वीडियो वायरल हो रहा है. विडियो में अनाड़ी फ़िल्म का एक सीन है जिसमें दवा कम्पनी के कुछ मालिक आपस में बात करते दिखाई देते हैं कि तेज़ी से बढ़ती बीमारी कैसे उन्हें और अमीर बना सकती है. विडियो के साथ लिखा है कि कैसे राजकपूर ने इतने साल पहले ही भविष्य देख लिया था.

ऐसी बहुत सी फ़िल्म्ज़ हैं जिनके बनने के कुछ साल बाद उस फ़िल्म में दिखाई गई घटनाएं दुनिया में घटीं. 2020 में जब भारत में कोरोना फैलना शुरू हुआ था तो Matt Demon की एक फ़िल्म, ‘Contagion का एक विडियो वायरल हुआ था. फ़िल्म में दिखाए गए हालात हू-ब-हू आज के हालात जैसे हैं. इस फ़िल्म में भी एक वायरस दुनिया में इस तरह फैलना शुरू होता है कि पूरी दुनिया को घरों में बंद हो जाना पड़ता है. हैरानी की बात ये है कि कोरोना 2019 में फैला है जबकि Contagion, 2011 की फ़िल्म है.

कुछ और दिलचस्प घटनाएं बताता हूँ. 16 मार्च, 1979 को अमेरिका में एक फ़िल्म रिलीज हुई जिसका नाम था, The Chinese Syndrome. फ़िल्म में दिखाया गया कि एक NUCLEAR POWER PLANT में एक हादसा हो गया और उसके परिणाम कितने भयानक हुए. इस फ़िल्म को अमेरिका की न्यूक्लियर इंडस्ट्री ने, अपना चरित्र हरण करती हुई, महज़ एक कल्पना करार दिया. लेकिन फ़िल्म रिलीज़ होने के ठीक 12 दिन बाद अमेरिका के ही एक न्यूक्लियर पावर प्लांट में एक हादसा हो गया. उस हादसे को Three mile island accident के नाम से जाना जाता है और ये दुनिया के सबसे बड़े nuclear हादसों में से एक है.

जॉर्ज ऑरवेल ने एक उपन्यास लिखा था जिसका नाम था ‘1984’. ये उपन्यास लिखा गया था 1949 में. इस उपन्यास पर इसी नाम से एक फ़िल्म बनी थी जो कि सन 1984 में ही रिलीज़ हुई थी. इस फ़िल्म में दिखाया गया था कि कैसे आने वाले समय में हर कहीं कैमरा लगा होगा और हर इंसान पर नज़र रखी जा रही होगी. कैसे सत्ता के ख़िलाफ़ बोलने वाले या किसी भी तरह की आज़ादी मांगने वाले को या तो कड़ा दंड मिलेगा या जान से मार दिया जाएगा. ज़रा सोचिए क्या आज सचमुच वही हालात नहीं हैं? आपके मोबाइल, बैंक खाते, फ़ेसबुक अकाउंट और ना जाने कितनी तरह से आप पर नज़र रखी जा रही है. आप क्या सोचते हैं, क्या बोलते हैं, क्या पहनते हैं, किस से बात करते हैं और किस से प्रेम करते हैं, आपके जीवन के हर पहलू पर आज सत्ता की नज़र है और आप अगर सत्ता के ख़िलाफ़ कुछ बोलना चाहेंगे तो आपको दंड भुगतना होगा.

2003 में आई फ़िल्म Eternal Sunshine of the Spotless Mind में जिस तरह नायक और नायिका की स्मृतियों को विज्ञान की सहायता से एक-एक कर हटाया जाता है, ठीक उसी तरह से अब टोरॉन्टो यूनिवर्सिटी में एक कोशिश हो रही है. यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की कोशिश है कि युद्ध के ट्रॉमा से गुजर रहे सैनिकों की दर्दनाक यादों को मिटा कर उनकी मदद की जा सके. 1968 में स्टेनली क्यूब्रिक की फ़िल्म ‘2001 – स्पेस ओडिसी’ में स्पेस टूरिजम की कल्पना की गई थी और आज ये कल्पना सच हो रही है. The Cable Guy में जिम कैरी का एक संवाद कि आने वाले समय में अमेरिका के हर घर में टीवी, फ़ोन और कंप्यूटर होंगे. T.V. में इतने सारे चैनल्स होंगे कि एक चैनल पर आप पैरिस का म्जूजियम लूवूर देख पाएंगे और दूसरे चैनल पर कुश्ती. अंतहीन सम्भावनाएं होंगी. और यही आज हो भी रहा है. 1976 में आई ‘Network’ अगर आप देखें तो आपको पता चलेगा कि उस फ़िल्म लेखक ने कैसे अंदाज़ा लगा लिया था कि टीआरपी  की भूख टेलीविज़न इंडस्ट्री को गर्त में ले जाएगी. आज के टेबलॉयड टीवी के हाल उस से अलग नहीं है.  सिर्फ़ अवधारणा तक ही नहीं, लेखकों ने आने वाली तकनीक का भी अंदाज़ा बहुत पहले लगा लिया था. Star Wars में दिखाए गए होलोग्राम को याद कीजिए या फिर टोटल रिकॉल की सेल्फ़ ड्राइविंग कार को. अभी कुछ ही दिन पहले मैं T.V. पर देख रहा था कि कैसे फ्रांस के सैनिकों के साथ मिल कर एक रोबॉट युद्ध लड़ने का अभ्यास कर रहा था, कैसे कुछ सैनिक एक समुद्री जहाज़ से दूसरे समुद्री जहाज़ तक उड़ कर जा रहे थे, किसी ‘Iron Man’ की तरह. ‘Die Hard 4’ की कहानी एक साईबर अटैक के चारों तरफ़ घूमती है और अब मैं लगभग हर महीने किसी ना किसी देश में साईबर अटैक की खबरें पढ़ता हूं. पिछले महीने अमेरिका की एक कम्पनी को हैकर्स ने इतनी बुरी तरह जकड़ लिया था कि कम्पनी को हार कर 5 मिलियन डॉलर की फिरौती देकर जान छुड़ानी पड़ी.

लॉकडाउन के बैल

मैं ऐसी फ़िल्मों की लिस्ट गिनवाता रह सकता हूं जिनमें किसी घटना को होने से पहले ही दिखा दिया गया हो. लेकिन मुद्दा ये है कि लेखक या फ़िल्ममेकर कोई भविष्यवक्ता नहीं होते. बल्कि ये लोग मनोविज्ञान और समाजशास्त्र के इतने गहरे ज्ञाता हैं कि ये समझ पाते हैं कि आने वाले समय में क्या होने वाला है और उसके क्या परिणाम होंगे. मुसीबत ये है कि हम इनकी कहानियों से मनोरंजन तो ले लेते हैं लेकिन कुछ सीख नहीं पाते. इन कहानियों के ज़रिए हम भविष्य में होने वाली दुर्घटना को जान भी जाते हैं लेकिन बदल नहीं पाते. कोरोना ने हमें दिखा दिया कि हमारी चिकित्सीय सुविधाएं अभी भी कितनी कच्ची हैं. मीडिया के गिरते स्तर ने हमें दिखा दिया कि पूंजीवाद कैसे न्यूज़ चैनल्स की गर्दन दबोच सकता है. और ये सारी बातें ये फ़िल्में हमें बता भी चुकीं थीं, फिर भी हम कुछ बदल नहीं पाए. इसे इस तरह देखिए कि भेड़ों का एक झुंड है जिसे पता है कि आगे एक गड्ढा है, फिर भी वो झुंड उसमें गड्ढे में गिर ही जाता है. और माफ़ कीजिए आप और हम वही भेड़ें हैं. फिल्मकारों ने समय-समय पर हमें आगे आने वाले गड्ढे के बारे में चेताया है लेकिन हमने हमेशा अनसुना कर दिया और जाकर गड्डे में गिरे. 

इन परिस्थितियों को देख कर ही मुझे श्री राम का, लक्ष्मण को दिया गया उत्तर याद आता है. श्री राम ने कहा था कि भविष्य को जान लेना अहम नहीं होता. अहम होती है आपकी प्रतिक्रिया. अहम होता है कि आप आने वाले समय को भांप कर उसके लिए तैयार हो पाते हैं या नहीं. भविष्य तो बहुत लोग भांप लेते हैं. लेकिन अहम ये होता है कि यदि कोई ख़तरा सामने खड़ा हो तो उसे समझ कर आप उसे रोक पाते हैं या नहीं. जो भविष्य का सटीक अंदाज़ा लगा कर सही कदम उठा सके, वही ईश्वर का रूप है.

गौरव आसरी फिल्म लेखक और निर्देशक हैं. वह कई फिल्में बना चुके हैं. उनकी शॉर्ट फिल्मों ‘बंजर’ और ‘काऊमेडी’ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार मिले हैं.

इस लेख में दिए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं और इन्हें एनआरआईअफेयर्स के विचार न माना जाए.

Follow NRI Affairs on Facebook, Twitter and Youtube.

मुझे माफ करना रमेश उपाध्याय, मैं आपकी हत्या का मूकदर्शक बना रहा!
Logo2
NRI Affairs News Desk

NRI Affairs News Desk

NRI Affairs News Desk

Related Posts

What women’s work songs reveal about the changing climate
Opinion

What women’s work songs reveal about the changing climate

April 30, 2026
Kashmir attacks: Kashmiris trapped between tourism and terrorism as an insecure nation looks to Modi for accountability
Opinion

India edges past England to become Australia’s top country of birth for first time

April 30, 2026
Goddess Kali stands unique in Hindu thought
Opinion

Goddess Kali stands unique in Hindu thought

April 29, 2026
Next Post
Delhi Airport

'Heartening': Australia changes rules for travel from India

Shukla

Indian-origin author turns down Queen's birthday honour

parents

Petition to allow parents under family reunion visa to be presented in Parliament

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

India-born CEO Offered Elon Musk-like Pay Package; Hopes to Revolutionise Electric Vehicle Industry

India-born CEO Offered Elon Musk-like Pay Package; Hopes to Revolutionise Electric Vehicle Industry

4 years ago
Ratan Tata honoured by “Order of Australia” for fostering bilateral ties

Ratan Tata honoured by “Order of Australia” for fostering bilateral ties

3 years ago
New research shows how politically motivated digital mobs in India prevent gender equality

New research shows how politically motivated digital mobs in India prevent gender equality

3 years ago
Centre for Australia-India Relations to receive $44 million funding from Albanese Government

India-Australia develop accelerator program to help cross-border impact of tech startups

2 years ago

Categories

  • Business
  • Events
  • Literature
  • Multimedia
  • News
  • nriaffairs
  • Opinion
  • Other
  • People
  • Student Hub
  • Top Stories
  • Travel
  • Uncategorized
  • Visa

Topics

Air India Australia california Canada caste china cricket Europe Gaza Hindu Hindutva Human Rights immigration India Indian Indian-origin indian diaspora indian student Indian Students Israel Khalistan Migration Modi Muslim Narendra Modi New Zealand NRI Pakistan Palestine politics Racism Singapore student students tariff trade travel trump UAE uk US USA Victoria visa Zohran Mamdani
NRI Affairs

© 2025 NRI Affairs.

Navigate Site

  • About
  • Advertise
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • News
  • Video
  • Opinion
  • Culture
  • Visa
  • Student Hub
  • Business
  • Travel
  • Events
  • Other

© 2025 NRI Affairs.

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
WP Twitter Auto Publish Powered By : XYZScripts.com