तुम और तुम जैसी स्त्रियाँ

अनुराग अनंत की एक प्रेम कविता: तुम मुक्तिबोध की कविता की तरह थींसमझने में कठिनलेकिन हर मोड़ पर मोह लेने वाली तुम मुझे बात बात पर चाक पर चढ़ा देती थींमेरी मिट्टी में अलग अलग मूर्तियाँ उभरने लगती थींमैं कील की तरह अपनी छाती में धँसता थाऔर ख़ुद के खोल को ख़ुद में टिका कर … Continue reading तुम और तुम जैसी स्त्रियाँ